नवरात्र में पूजन अर्चन से बढ़ती है शरीर की  रोगप्रतिरोधक क्षमता और सकारात्मक ऊर्जा

गाजीपुर, 29 मार्च 2020। वैश्विक महामारी कोविद 19 (कोरोना) के संक्रमण को रोकने हेतु सरकार द्वारा जारी “लॉक डाउन” फैसले को धर्माचार्यों द्वारा सही ठहराते हुए उसका सभी से पालन करने का आग्रह किया गया है।
प्रसिद्ध शक्ति सिद्धपीठ हथियाराम मठ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी श्री भवानी नंदन यति जी महाराज ने कहा कि सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देश का हम सभी को पालन करना चाहिए ताकि इस पर शीघ्र नियंत्रण किया जा सके। उन्होंने कहा कि जन स्वास्थ्य को संक्रमण से बचाने रखने के लिए शासन प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का हम सभी देशवासियों को पालन करने की आवश्यकता है।
बताते चलें कि चैत्र नवरात्र में प्रसिद्ध मां काली धाम मंदिर हरिहरपुर में लगातार भक्तों का मेला लगा रहता था। घंटे घड़ियाल की ध्वनि तथा हवन पूजन की सुगंधित मनभावनी गंध से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हुआ करता था। आज वहां मंदिर के बाहर चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है। परिसर के गेट पर ताला बंद है। भक्तजनों व श्रद्धालुओं का प्रवेश पूर्णतः वर्जित है। परिसर के भीतर महाराज श्री के निर्देशन में विद्वान वैदिक ब्राह्मणों द्वारा नवचंडी यज्ञ के 11 कुंडीय मंडप में वैदिक मंत्रोंच्चार के मध्य आहुतियों का क्रम जारी है। हरि हरात्मक पूजन व अग्निहोम के साथ मां जगदंबा की साधना में समर्पित महाराजश्री ने कहाकि देशवासियों के समृद्धि, आर्थिक मजबूती, निरोगता तथा विश्वकल्याणार्थ कोरोना से रोग मुक्ति के संकल्प के साथ यह यज्ञ तथा हवन पूजन जारी है। उन्होंने कहा कि मेरा कर्म उपासना है जो मैं कर रहा हूं। इसके अतिरिक्त भी इस वैश्विक महामारी से बचाव के लिए मेरी जहां भी आवश्यकता होगी मैं उसके लिए सदैव तत्पर रहूंगा।
बासंतिक नवरात्र पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह समय माता भगवती की आराधना और उपासना के लिए अत्यन्त शुभ माना जाता है। चैत्र माह में प्रकृति भी आह्लादित होती है। हर तरफ नये जीवन का, एक नई उम्मीद का बीज अंकुरित होने लगता है। नवीनता युक्त इस मौसम में प्राणियों में एक नई उर्जा का संचार होता है। लहलहाती फसलों से उम्मीदें जुड़ी होती हैं। सूर्य अपने उत्तरायण की गति में होते है। इस समय मां भगवती की आराधना, पूजन अर्चन करने से विशेष अनुभूति होती है और शरीर में नव स्फूर्ति का संचार होता है।
महाराज श्री ने कहा कि आज आवश्यकता है कि लोग अपने घरों में रहकर मां भगवती की आराधना, साधना और भजनपूजन और हवन करें। अपने अपने घर में संध्या समय प्रतिदिन आरती के समय शंख ध्वनिके साथ घंटा घड़ियाल बजायें। इससे उत्पन्न ध्वनि तरंगों तथा हवन पूजन से निकली सुगंध से हानिकारक जीवाणुओं का नाश होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
महाराजश्री ने कोरोना को दूर भगाने में लगे कर्म योद्धाओं,शासनिक प्रशासनिक अधिकारियों व विभागीय जनों, पुलिसकर्मियों, चिकित्सकों, पत्रकारों सहित देशहित में लगे सभी संस्थानों के लोगों को उनके कार्यों की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
उन्होंने कहा कि गंगाजल स्वयं में विशिष्ट है। इसमें औषधीय गुण हैं जिनके कारण यह कभी खराब नहीं होता जबकि गंगा में प्रवाहित हानिकारक तत्व स्वयं नष्ट हो जाते हैं। साथ ही मानव को स्वस्थ रखने में तुलसी, हल्दी, दूब तथा कुश की महत्वपूर्ण भूमिका पौराणिक काल से रही है। इनके प्रयोग से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। उन्होंने इन पांच तत्वों पर अनुसंधान की आवश्यकता पर बल देते हुए, कोरोना से निपटने के लिए चिकित्सा के क्षेत्र में लगे वैज्ञानिकों से इस पर कार्य करने का भी आग्रह किया।


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