फिल्म गोदाम ! किसानों के दुखदर्द को बयां करती मर्मस्पर्शी कहानी

गाजीपुर, 05 मार्च 2020। आध्यात्मिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और साहित्यिक विरासत संजोए तथा देश सेवा में रत वीरों से सुसज्जित व मां गंगा के जल से सिंचित गाजीपुर की धरा ने सदैव मार्गदर्शक का काम किया है। गाजीपुर की पनपी प्रतिभाओं ने अपनी क्षमता के बल पर कला और साहित्य के साथ साथ विभिन्न विधाओं में सराहनीय कार्य कर देश प्रदेश के साथ ही साथ विश्व पटल पर नाम रोशन कर इस धरती को गौरवान्वित किया है।
उसी क्रम में गाजीपुर के ग्रामीणांचल के ग्राम भाला निवासी फिल्म निर्माता सुजीत प्रताप सिंह ने शहर के राही पर्यटक होटल में वुधवार को पत्रकार वार्ता में अपनी प्रदर्शित होनेवाली फिल्म “गोदाम” पर जानकारी दी।
अनाज सड़ जाने के इशू पर बेस्ड है निर्माता सुजीत प्रताप सिंह की फिल्म ‘गोदाम’। अक्सर इलाहाबादी- अखिल गौरव सिंह द्वारा निर्देशित फिल्म में किसानों की हालत दर्शाई गई है। “खाना सब चाहते हैं उगाना कोई नहीं चाहता”निर्माता सुजीत प्रताप सिंह की आनेवाली फ़िल्म का शीर्षक है “गोदाम”
उन्होंने कहा कि देश के किसानों तथा जवानों के मूल धरातल पर आधारित भावना प्रधान फिल्म घटनाओं तथा हादसों के शिकार लोगों को समर्पित है। यू.के.तथा यू.एस. के वर्जिनिया से बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड विजेता तथा दादा साहब फाल्के पुरस्कार के लिए नामांकित सिर्फ भारत ही नहीं विश्व के किसानों की समस्याओं पर आधारित इस फिल्म को इलाहाबाद,चेन्नई तथा गाजीपुर में फिल्माया गया है।
पूरी तरह से ग्रामीण जीवन के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक मूल्यांकन पर आधारित सार्थक सिनेमा के बैनर तले बनी भावना प्रधान बालीबुड की हिन्दी फिल्म “गोदाम” 3 अप्रैल को देश के सिनेमा हालों में प्रदर्शित की जाएगी।
यह फिल्म नगरों तथा बड़े शहरों में बसे लोगों को गांव की सभ्यता, संस्कृति तथा भाईचारे की ओर प्रेरित करती है। 131मिनट की यह फिल्म आज के परिवेश में भी अलग पहचान बनाने में सक्षम होगी। उन्होंने कहा कि इस फिल्म में करोड़ों किसानों तथा लाखों जवानों का दर्द छिपा है।
उल्लेखनीय है कि बॉलीवुड में इन दिनों सच्ची घटनाओं से प्रेरित कहानियों पर फिल्मे बनाई जा रही हैं। अप्रैल में रिलीज होने जा रही है सार्थक सिनेमा के बैनर तले बनी फिल्म ‘गोदाम’ भी रियल इन्सिडेंट्स पर बेस्ड है। निर्माता सुजीत प्रताप सिंह और अक्सर इलाहाबादी- अखिल गौरव सिंह द्वारा निर्देशित फिल्म गोदाम में हमारे देश और समाज की एक कडवी सच्चाई को पेश किया गया है। असल में हमारे देश में किसान दिन रात कड़ी मेहनत कर फसल उगाते तो हैं परन्तु उनको उचित मूल्य नहीं मिल पाता जिसके चलते खुद उनकी हालत दयनीय होती है। हमारे यहाँ अनाज को संचित करने के लिए गोदाम ज्यादा नहीं हैं जिसकी कमी की वजह से काफी अनाज सड़ जाते हैं। यह फिल्म उसी किसान के मर्म को प्रस्तुत करती है –
फिल्म की कहानी एक छोटे और आर्थिक रूप से बेहद कमजोर गरीब किसान गोबर से शुरू होती है। गांव की ही एक लड़की ‘हल्दी’ से प्यार करनेवाले गोबर का सपना उसके पुरखों की जमीन पर बने और गिरवी पड़े गोदाम को गोदाम सिंह से छुड़वाना है। दूसरी तरफ हल्दी के पिता भी गोबर के सामने एक शर्त रखते हैं कि गोबर वह गोदाम छुड़वा ले, तभी हल्दी की शादी गोबर से कर सकता है। इस बीच, एक सरकारी अफसर गांव के विकास का निरीक्षण करने के लिए आता है।इसके बाद कहानी सरपट दौड़ पड़ती है। इसके बाद कहानी धीरे-धीरे सामने आती है, क्या गोबर हल्दी का हाथ पाया या नहीं और वह गोदाम हासिल कर पाता है या नहीं? यह आपको फिल्म देख कर पता चलेगा…….


इस फिल्म को दुनिया भर के कई फिल्म महोत्सवों में दिखाया गया है जहाँ इसकी प्रशंसा हुई और अवार्ड्स मिले हैं। अमेरिका में हुए एक फिल्म फेस्टिवल में इसको बेस्ट पिक्चर और बेस्ट डायरेक्टर का अवार्ड भी मिला है। अक्सर इलाहाबादी और अखिल गौरव सिंह द्वारा लिखित इस फिल्म का संगीत चेन्नई के टी एस मुरलीधरन ने कम्पोज किया है जबकि इसके गीत अक्सर इलाहाबादी ने लिखे हैं। फिल्म की शूटिंग शंकर गढ़ इलाहाबाद और गाजीपुर में हुई है।फिल्म के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर अक्षत कुशवाहा और अरुण शुक्ल हैं।
फिल्म में गोबर की मुख्य भूमिका में बिपिन पानीग्रही, हल्दी के रोल में बबली, विकास बाबु के रोल में सुजीत सिंह, दरोगा के रोल में ऋत्विक और गोदाम सिंह के रोल में संजीव नंदा ने जीवन्त अभिनय किया है।देखें ट्रेलर

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