भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र

लखनऊ,16जनवरी 2020। राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) भारत क्षेत्र के सातवें सम्मेलन का आगाज लोकसभाध्यक्ष ओम बिड़ला ने किया। सम्मेलन की थीम “जनप्रतिनिधियों की भूमिका” रही।


अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि पिछले सात दशकों में सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्र में हमारी संसद की उपलब्धियाँ उल्लेखनीय रही हैं।उन्होंने कहा कि भारत के लोगों की सहज लोकतांत्रिक आस्था ही हमारी ताकत है।
संसद, हमारे संविधान के उच्च आदर्शों जैसे सहभागी लोकतंत्र, सामाजिक व धार्मिक बहुलवाद, सामाजिक न्याय तथा नागरिकों की सामाजिक, आर्थिक व वैज्ञानिक प्रगति में अहम भूमिका निभा रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारा लोकतंत्र समय की कसौटी पर खरा उतरा है। लोकतंत्र आमजन की खुशहाली के लिए है। अनेकता में एकता भारत के लोकतंत्र का मूलमंत्र है। एकता -विविधता को देश के लोकतंत्र ने सहजता से अपना लिया है। तमाम चुनौतियां हैं जिनका समाधान ऐसे सम्मेलन से निकलेगा।
इससे पूर्व विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि यह सदन ऐतिहासिक सदन है जो देश की सबसे बड़ी जनसंख्या का नेतृत्व करता है। यहां हम दो दिन तक विचार विमर्श करेंगे। बताते चलें कि सीपीए में कुल 9 रीजन है। इनमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, कनाडा, मलयेशिया, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान, तंजानिया और यूनाइटेड किंगडम हैं। कॉन्फ्रेंस में लोकसभा अध्यक्ष, राज्यसभा के उप सभापति, सभी विधानसभाओं और विधान परिषदों के अध्यक्ष, सभापति, प्रमुख सचिवों के साथ आठ देशों के 141 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

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