सवर्ण आरक्षण ! राज्य सभा में पास , राष्ट्रपति की मुहर के बाद बनेगा कानून
नई दिल्ली, 10 जनवरी 2019। आरक्षण के दायरे से बाहर गरीब सवर्ण आबादी को सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा लाया गया 124वां संविधान संशोधन विधेयक कल वुधवार को राज्य सभा में करीब 10 घंटे तक चली बैठक के बाद पास हो गया। बिल के पक्ष में 165 मत तो विपक्ष में सात मत पड़े। सदन ने विपक्ष द्वारा लाए गए संशोधनों को मत विभाजन के बाद नामंजूर कर दिया। लोकसभा ने इस विधेयक को एक दिन पहले ही मंजूरी दी थी। अब इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जायेगा। राष्ट्रपति की मुहर के बाद यह कानून बन जायेगा।
ज्ञातव्य है कि उच्च सदन में विपक्ष सहित अधिकांश दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया परन्तु विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लोकसभा चुनाव से कुछ पहले लाए जाने पर सरकार की मंशा पर आशंका जताई। चर्चा में भाग लेते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आर्थिक आधार पर सामान्य वर्ग को आरक्षण देने के मोदी सरकार के फैसले को मैच जिताने वाला छक्का बताते हुये कहा कि अभी इस मैच में विकास से जुड़े और भी छक्के देखने को मिलेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह साहसिक फैसला समाज के सभी वर्गों को विकास की मुख्य धारा में समान रूप से शामिल करने के लिए किया है।
केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए इसे सरकार का एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह हमारी संस्कृति की विशेषता है कि जहां प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने एससी और एसटी को आरक्षण दिया वहीं पिछड़े वर्ग से आने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सामान्य वर्ग को आरक्षण देने की यह पहल की है। इस विधेयक के पास होने के बाद कल आगरा में एक जनसभा में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बगैर संविधान संशोधन के गरीब सवर्णों को आरक्षण देना संभव नहीं था, यह बात मैं मुख्यमंत्री के तौर पर भी कहता रहा था और अब प्रधानमंत्री के तौर पर इसे करके भी दिखाया है । हम ने दलितों, आदिवासी व ओवीसी का हक मारे बिना यह कार्य किया है, जो सबके हित में है।
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