परिषदीय स्कूलों के अध्यापकों ने आनलाइन हाजिरी के विरुद्ध बुलन्द की आवाज
मुख्यमंत्री को भेजा सात सूत्रीय ज्ञापन
संकुल प्रभारी व संकुल शिक्षक के प्रभार से दिया सामुहिक इस्तीफा
गाजीपुर। प्रदेश सरकार के तुगलकी फरमान, आनलाइन हाजिरी के खिलाफ लामबंद अध्यापक समुदाय ने, प्रांतीय संगठन के आह्वान पर संध्या तीन बजे जिला मुख्यालय के कचहरी के समीप सरयू पांडेय पार्क में धरना प्रदर्शन किया।
शिक्षक, शिक्षा मित्र, अनुदेशक कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले आयोजित विशाल धरना के उपरांत आनलाईन उपस्थिति के विरोध में, जिलाधिकारी के माध्यम से, अपना सात सूत्रीय ज्ञापन मुख्यमंत्री को प्रेषित किया। इस दौरान जिले के हजारों अध्यापक मौजूद रहे।
अपने सम्बोधन में वक्ताओं ने प्रदेश सरकार पर शिक्षकों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए उनकी मांगों की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव में आनलाईन उपस्थिति लगवाना हमारा उत्पीड़न है जिसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा। विद्यालयों में गरीब घरों के बच्चे टाट पट्टी पर बैठते हैं, टैबलेट से अधिक आवश्यकता विद्यालयों को फर्नीचर उपलब्ध कराने की है। अनेकों स्कूल रास्ते की समस्या से परेशान हैं, विद्यालय में शिक्षकों को रूकने की तथा यातायात की व्यवस्था नहीं है। वर्तमान सरकार अध्यापकों से शिक्षण के अतिरिक्त दर्जनों काम आफलाइन मोड में करवा रही है। परिवार सर्वेक्षण,बाल गणना, जनगणना, मिड डे मील, फल वितरण, दूध वितरण, अनाज बांटना, आधार कार्ड बनवाना , बी एल ओ का कार्य , मतदाता सूची पुनरीक्षण, चुनाव , टीकाकरण, दवा वितरण, डी बी टी फीडिंग, मीटिंग , ट्रेनिंग, बोर्ड परीक्षा, सफाई , भवन निर्माण जैसे कार्य आफलाइन करने के बाद विद्यालयों मे आनलाईन ड्यूटी करना समझ से परे है। यदि सरकार आनलाईन उपस्थिति चाहती है तो विद्यालयों में कंप्यूटर आपरेटर की नियुक्ति की जाय। वहीं शिक्षकों को पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू करनी चाहिए।
उन्होंने शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के मानदेय मे वृद्धि या नियमतीकरण, शिक्षा मित्रों को न्यायोचित मानदेय, प्रत्येक विद्यालयों में परिचारकों की नियुक्ति की मांग उठाई ताकि अध्यापक स्वतंत्र होकर शिक्षण कार्य कर सकें। उन्होंने कहा कि अध्यापकों को शिक्षण कार्य के अतिरिक्त अन्य कार्य कराने हेतु मजबूर नहीं किया जा सकता।
वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार हमारी मांगों को अनदेखी करेगी तो आने वाले विधानसभा चुनाव में सभी शिक्षक एकजुट होकर सरकार का तख्ता पलटने को मजबूर होंगे।
धरने में प्राथमिक शिक्षक संघ, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन,शिक्षा मित्र संघ, आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन, महिला शिक्षक संघ, TSCT शिक्षक संघ, यूटा शिक्षक संघ, अनुदेशक संघ ने प्रतिभाग किया।कार्यक्रम को माध्यमिक शिक्षक संघ गाजीपुर के अध्यक्ष शिवकुमार सिंह ने अपने पदाधिकारियों सहित उपस्थित होकर समर्थन प्रदान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जयप्रकाश पांडेय जिलाध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ व संचालन डा दुर्गेश प्रताप सिंह,प्रमोद उपाध्याय, मानवेंद्र सिंह ने संयुक्त रूप से किया।
इसी क्रम में ऑनलाइन हाजिरी को लेकर परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों व विभाग के बीच चल रही रस्साकसी अब और रफ्तार पकड़ती जा रही है। सोमवार को शिक्षकों ने एक और कदम आगे बढ़ा दिया है। जिसमें सादात ब्लॉक के करीब 65 शिक्षकों ने सोमवार को खंड शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार पान्डेय को संकुल प्रभारी व संकुल शिक्षक के प्रभार से सामूहिक इस्तीफा दे दिया। इस कार्रवाई से शिक्षकों के इरादे और साफ हो गए हैं, कि अब वह शायद पीछे हटने वाले नहीं है।
दरअसल आठ जुलाई से लागू ऑनलाइन हाजिरी का शिक्षक संगठन विरोध कर रहे हैं। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ व उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संगठन अपने-अपने तरीके से योजना का विरोध कर रहे है। शिक्षक स्कूल पहुंच रहे हैं और हाथों में काली पट्टी बाँधकर बच्चों को पढ़ा भी रहे है। लेकिन वह ऑनलाइन डिजिटल हाजिरी का बहिष्कार किए हुए हैं। अधिकारियों ने शिक्षकों को लाख समझाने की कोशिश की, लेकिन अब तक वह नहीं माने हैं। बीआरसी कार्यालय पर इस्तीफा देने वाले शिक्षकों में राजेश यादव, सन्तोष सिंह, संजय कश्यप, पंकज यादव, सोनू खरवार, मुकुन्द कुशवाहा, आखिर यादव, राजेश ओझा, विश्वास मणि सिंह, सुरजीत सिंह आदि प्रमुख रहे।
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