कविता ! “बिटिया हुई हलाल “

अलीगढ़ में मासूम बिटिया की हत्या पर कवि अशोक राय वत्स की रचना


“बिटिया हुई हलाल ”

द्रवित हो गया मन है मेरा, कलम हो गई कुन्द है,
आज अली के गढ में देखो, बिटिया हुई हलाल है।

तीन वर्ष की बेटी आखिर ,छोड़ गई संसार को,
प्रश्न वही फिर छोड़ गई, वह फिर से आज विचार को।

कहाँ गए वो चैनल वाले, कहाँ गए सब रोने वाले,
कहाँ गई वह कठुआ गैंग, कहाँ गई माया नगरी।

आज छुपे हैं सबके सब,पट्टी बांध कर आंखों पर,
क्यों भूल गए सब ट्विंकल को, वह भी तो किसी की बेटी है।

मैं पूछ रहा हूं यह सबसे, वो बाँलीवुड वाले कहाँ गए,
जो बात दोगली करती हैं, वो भोली सकलें कहाँ गई।

मैने सोचा इंसाफ मिलेगा, ट्विंकल बिटिया की चीखों को,
मैं भूल गया मैं बैठा हूँ, गूंगे बहरे दरबारों में।

उठो उठो संघर्ष करो, ट्विंकल को न्याय दिलाने को,
आग लगा दो उस बहसी पन को, जहाँ जन्म मिला है जाहिद को।

ऐसी मौत देओ भाई, इन बहसी कौमी जल्लादों को,
कोई जाहिद पैदा न हो, ज़ो आंख उठाए बहनों पर।

सुनो वत्स की बात नहीं तो, भरते रहना जख्मों को,
आज जनाजा ट्विंकल का है, कल रोना अपनी बहनों पर।।

कवि – अशोक राय वत्स © स्वरचित

रैनी (मऊ),उत्तरप्रदेश

मोबाइल नं. 8619668341

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