भोजपुरी साहित्य सम्मेलन की राष्ट्रीय बैठक में पुस्तकों का हुआ विमोचन

 

भोजपुरी को सशक्त बनाने पर हुआ मंथन 


पटना। ‘अखिल  भारतीय  भोजपुरी साहित्य  सम्मेलन ‘ की राष्ट्रीय  कार्य कारिणी की बैठक सोमवार को माध्यमिक  शिक्षक  संघ भवन पटना के सभागार  में सम्पन्न हुई।

         संस्था के अध्यक्ष  डाॅ.महामाया प्रसाद  ‘विनोद’ की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों के अलावा संगठन की प्रवर समिति के विशिष्ट आमंत्रित सदस्यों ने भाग लिया।

          बैठक में सदस्यों ने संस्था के गौरवमय इतिहास के अनुरूप  भावी कार्य-योजनाओं की स्पष्ट रूपरेखा तैयार कर उसके चरणबद्ध कार्यान्वयन पर जोर दिया। सदस्यों ने संस्था को  विभिन्न जिला मुख्यालयों और देश के विभिन्न  नगरों/महानगरों में भी भोजपुरी साहित्य एवं संस्कृति से जुड़े सेमिनार, गोष्ठी, कवि सम्मेलन, पुस्तक एवं कला प्रदर्शनी आदि नियमित  अंतराल पर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उपस्थित साहित्यकारों ने संगठन की पत्रिका ‘भोजपुरी साहित्य सम्मेलन ‘ के बेहतर स्वरूप में प्रकाशन हेतु अपने सुझाव दिये।साहित्यकारों का विचार था कि ‘अभाभोसास ‘  के तत्वावधान में स्तरीय पुस्तकों के प्रकाशन, संस्था की वेबसाइट विकसित करने, संस्था एवं पत्रिका की सदस्य संख्या बढ़ाने आदि पर भी गंभीरतापूर्वक विचार किया गया।

        बैठक में संविधान की आठवीं अनुसूची में भोजपुरी के प्रवेश तथा साहित्य अकादमी से भोजपुरी को मान्यता दिलाने और अधिक गंभीरतापूर्वक काम करने तथा इसे जनान्दोलन का रूप प्रदान करने की जरूरत  पर बल दिया गया।

            बैठक में अमनौर (सारण) अधिवेशन की सफलता पर संतोष व्यक्त किया गया।अध्यक्ष डाॅ.महामाया प्रसाद विनोद ने कहा कि संस्था की सक्रियता बढ़ाते हुए भोजपुरी साहित्य  और संस्कृति के विकास  हेतु सार्थक प्रयास किये जायेंगे।

          कार्यक्रम के दौरान ‘ सोने फूल फूले’ (लेखक-गणेश चौबे,संपादक-ब्रजभूषण मिश्र), ‘धरती के गीत ‘ (कवि -सुरेश  कांटक) एवं ‘जोहार  भोजपुरिया माटी’ (संपादक-कनक किशोर) आदि पुस्तकों/पत्रिका का लोकार्पण  भी हुआ। बैठक में अभिधा प्रकाशन द्वारा अपने प्रकाशन  की भोजपुरी किताबों की प्रदर्शनी भी लगाई गयी थी।

       बैठक में पूर्व अध्यक्ष  डाॅ.ब्रजभूषण मिश्र, कार्यकारी अध्यक्ष भगवती प्रसाद द्विवेदी, महामंत्री प्रो.जयकांत सिंह, कोषाध्यक्ष जितेन्द्र कुमार, डाॅ.विष्णुदेव तिवारी, डॉ.सुनील कुमार पाठक, शिवानुग्रह नारायण सिंह, जगमोहन कुमार, रामबहादुर राय, सौरभ पांडेय, ज्योतिष पांडेय, दिलीप कुमार, डाॅ.ओमप्रकाश  राजापुरी,   डाॅ.जगमोहन कुमार, जलज मिश्र अनुपम, कौशल मोहब्बतपुरी आदि साहित्यकारों ने अपने विचार  व्यक्त किये।

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