“मनहरण छंद घनाक्षरी”

“मनहरण छंद घनाक्षरी”


राहें पटी हैं भीड़ से ,भूख की पदचाप से,
बढ़ चलो घरों को रे, हैं यही पुकारते।

नेता कई आते रहे ,सपने दिखाते रहे,
सहायता मिली नहीं, पेट भी भरा नहीं।

कह रहा गरीब ये,काम कुछ मिला नहीं,
फोटो हमारी खींच ली, रोक रोक राह में।

कवि – अशोक राय वत्स
रैनी, मऊ,उत्तरप्रदेश

,मो.नं. 8619668341

Views: 8


Leave a Reply