ग्रामीण पत्रकारिता दिवस – संघे शक्ति कलियुगे

गाजीपुर (उत्तर प्रदेश ), 27 मई 2018। किसी भी स्वस्थ्य समाज के निर्माण में पत्रकारिता की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण होती है। हमारे देश भारत में आवादी का अधिकांश भाग गावों में निवास करता है और ग्रामीण विकास हेतु ग्रामीण पत्रकारिता, पत्रकारिता का महत्वपूर्ण अंग है।
आज संचार माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के चलते पत्रकारिता में नयापन आया है। संचार माध्यमों की बदौलत नये साधनों से पत्रकारिता को नई गति मिली है। इसमें ग्रामीण पत्रकारों की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। शहरों तथा कार्यालयों में बैठे पत्रकार शहर तथा मुख्य स्थानों की खबरें कार्यालय में प्राप्त कर लेते हैं परंतु दूर की क्षेत्रीय घटनाओं की जानकारी ग्रामीण पत्रकार ही वहां से इकट्ठे कर कार्यालय तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। ग्रामीण पत्रकार अपने आसपास की खबरों को पूरी तन्मयता के साथ तैयार कर कार्यालय को प्रेषित करते हैं। वास्तव में यह सत्य है कि यदि ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत पत्रकार न हो तो सिर्फ शहरों और मुख्य कस्बोंं में कार्यरत पत्रकारों के बल पर कोई भी समाचार पत्र पूूर्ण नहीं हो सकता। समाचार पत्र को पूर्णता प्राप्त करने के लिए शहरों के साथ साथ देहात क्षेत्रों की खबरों को भी प्रमुखता देनी होती हैं और गांव व आसपास की घटनाओं की जानकारी ग्रामीण पत्रकार के द्वारा ही अखबारों के दफ्तरों तक पहुंंचती हैंं। ग्रामीण पत्रकारों की भूमिका आज इसलिए भी महत्वपूूूर्ण है कि शासन प्रशासन की सारी जानकारियां ग्रामीणोंं तक पहुंचाने तथा गांव की समस्याओं को शासन तथा प्रशासन तक पहुंचाने में ग्रामीण पत्रकार ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत पत्रकारों की सुरक्षा, संरक्षा तथा उनके हक हकूक के लिए आवाज उठाने वाला ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के संस्थापक स्वर्गीय बालेश्वर लाल की पुण्य तिथि 27 मई को ग्रामीण पत्रकारिता दिवस के रुप में मनायी जाती है।
ग्रामीण पत्रकार के रुप में बलिया जिले में कार्यरत स्व. लाल उस जमाने में ग्रामीण पत्रकारों की समस्याओं से रुबरु होते रहे। उन्होंने महसूस किया कि ग्रामीण पत्रकार की सुधि लेने वाले कोई नहीं हैं। इसी टीस को लेकर काफी सोच विचार के बाद उनमें ग्रामीण पत्रकारों के हित के लिए एक संगठन बनाने की सोच बलवती होती गयी। इसी सोच को गतिशील कर लक्ष्य में बदलते हुए उन्होंने 8 अगस्त 1982 को अपने सात पत्रकार साथियों के साथ प्रदेश के बलिया जनपद के गड़वार में “संघे शक्ति कलियुगे” को चरितार्थ करते हुए जिला स्तरीय समिति का गठन किया । उपस्थित सभी पत्रकारों ने एक जूटता का परिचय देते हुए इस संगठन को आगे बढ़ाने का वीणा उठाया। यह उनके प्रयासों का ही फल रहा कि लखनऊ के अमीनाबाद के गंगा प्रसाद मेमोरियल हाल में हुई उनकी दूसरी बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगभग तीन सौ ग्रामीण पत्रकार उपस्थित हुए। वहीं से ” ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उ. प्र. ” का उदय हुआ। ग्रामीण पत्रकारों के सार्थक प्रयास से इस एसोसिएशन की शाखाएं प्रदेश के हर जिले से लेकर तहसील व ब्लॉक स्तर तक बन गयीं। अपने सदस्य संख्या के बल पर आज एसोसिएशन प्रदेश का सबसे बड़ा पत्रकार संगठन बन गया है। स्व. बालेश्वर लाल का जन्म 1 जनवरी 1930 को हुआ था और उन्होंने 27 मई 1987 को इस संसार से बिदा लिया था।
ग्रामीण पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका देखते हुए ग्रामीण पत्रकारों की मांग पर 29 मई 1993 को प्रदेश के राज्यपाल मोतीलाल वोरा के निर्देश पर ग्रामीण पत्रकारों की समस्याओं के निराकरण हेतु पूूर्व सूचना निदेशक के संयोजकत्व में एक समिति का गठन किया गया उस समित की रिपोर्ट के आधार पर 15 दिसंबर 1993 को प्रदेश सरकार ने एक शासनादेश जारी कर गांव के पत्रकारों को उनका हक दिलाने का प्रयास किया । सरकार ने ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के एक पत्रकार को जिला स्तरीय स्थाई समिति में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में उपस्थित होने का गौरव प्रदान किया। तब से लेकर आज तक हर जिले मेंं प्रेस स्थाई समिति की बैठक में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन का एक सदस्य उपस्थित रहता है।
ग्रामीण पत्रकारों को संगठित कर उनको उनके हक के लिए जागृति पैदा करने वाले उस महापुरुष को उनकी 33वीं पुण्यतिथि पर हार्दिक श्रद्धांजलि …………।
डा.ए.के.राय जिला महामंत्री
ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उ.प्र.


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