कवि हौशिला प्रसाद अन्वेषी की रचना

अब हमको ही आना होगा।
अपना फर्ज निभाना होगा ।।


जहाँ कहीं भी गलत हो रहा।
वहीं दौड़कर जाना होगा।।

रोक लगाकर सबक सिखाकर ।।
आगे को बढ़ जाना होगा।।

चुस्त दुरूस्त मुकम्मल करके।
ऊँचा ध्वज फहराना होगा।।

क्रय विक्रय करनेवालों को।
उचित मार्ग पर लाना होगा।।

देश हमारा रहे सलामत ।
ऐसा मंत्र जगाना होगा।।

श्रम को अपना धर्म बनाकर।
उत्तम देश बनाना होगा ।।

कथनी करनी के अंतर को।
बेशक हमें मिटाना होगा ।।

केवल सत्य रहे जीवन में।
खुद को यह समझाना होगा ।।

शोषण के सारे विधान को।
इधर उधर दफनाना होगा ।।

एकमात्र मानवता को ही।
अपना धर्म बनाना होगा।।

नया आदमी गढ़ लेने पर ।
सपना नया उगाना होगा ।।

इस समाज को नए राष्ट्र का।
सपना हमें दिखाना होगा ।।

चमकदार यह देश बनाकर ।।
हरदम जश्न मनाना होगा
।।

विधि विधान से प्रेम बाँट कर ।
राष्ट्रगीत को गाना होगा ।।

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