अलीशा इरफान हत्याकांड ! बहनोई ही निकला कातिल

गाजीपुर,06 नवम्बर 2019। पुलिस की तेज नजरें हत्यारों की चाल पर भारी पड़ी। मृतका की शिनाख्त छुपाने की गरज से शव को क्षत विक्षत कर शहर से दूर अन्य थाना क्षेत्र में फेंकने के बाद भी आखिरकार हत्यारा बहनोई पुलिस की जद में आ ही गया।
बात गत दो नवम्बर की है। जब बिरनो थाना क्षेत्र के दुल्लहपुर मार्ग पर अलसुबह महमूदपुर ढेबुआ के रामू श्यामू के भट्ठे के समीप सड़क के किनारे झाड़ी में एक युवती का लहुलुहान शव पड़ा मिला। ग्रामीणों ने इसकी सूचना तत्काल बिरनो थानाध्यक्ष अब्दुल वसीम खान को दी। जो अपनी टीम सहित मौके पर पहुंच शव को कब्जे में लेकर तहकीकात आरम्भ करते हुए उच्चाधिकारियों को सूचित किया। युवती के शव के गले पर धारदार हथियार के निशान थे और हत्यारों ने शव की शिनाख्त मिटाने हेतु शव के चेहरे पर अनेकों घाव कर शिनाख्त मिटाने की भरपूर कोशिश की थी। बिरनो पुलिस ने मामला दर्ज कर कारर्वाई शुरू कर दी। शाम को पता चला कि मृतका अलीशा इरफान पुत्री सैयद इरफान जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र के मुस्तफाबाद न्यू कालोनी की निवासी थी,जो बीटीसी की छात्रा थी और एक दिन पूर्व घर से अपने कालेज गयी थी और जब रात तक वापस नहीं आयी तो परिजनों से उसकी खोज की, परन्तु कोई पता न चलने पर सदर कोतवाली पहुंचे जहां से अज्ञात शव मिलने की जानकारी मिली। शव देखकर उन्होंने उसकी शिनाख्त अलीशा इरफान के रुप मे की थी।

पुलिस अधीक्षक ने घटना के शीघ्र अनावरण हेतु क्राइम ब्रांच व थाना बिरनो की पुलिस टीम गठित की थी। घटना की तहकीकात में टीम ने घटनास्थल का विधिवत निरीक्षण कर मृतका के मोबाइल कॉल डिटेल का विश्लेषण कर विकसित किया। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर क्राइम ब्रांच तथा बिरनो थाना की संयुक्त टीम ने हत्यारे को कल रात करीब साढ़े दस बजे शहर के रौजा तिराहे से गिरफ्तार कर लिया। हत्यारे की पहचान इमाम अहमद सिद्दीकी उर्फ इमाम बख्श पुत्र रियाज अहमद निवासी पखनपुरा थाना भांवरकोल जिला गाजीपुर के रुप मे हुई। इस सम्बंध में पुलिस ने लाल रंग की आई स्मार्ट बाइक नंबर यूपी 61 ए एम 2086 तथा आला कत्ल चॉपर व मृतका का गुलाबी रंग का बैग, चप्पल तथा दो मोबाइल बरामद किया है।
आज प्रेस वार्ता में पुलिस अधीक्षक डॉ अरविंद चतुर्वेदी ने इसकी पुष्टि करते हुए घटना पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मृतका का बहनोई ही मृतका का कातिल निकला। गिरफ्तार अभियुक्त पूछताछ में बताया कि मैं मृतका का बहनोई हूं। मृतका 8 बहनें तथा दो भाई हैं। जिसमें मृतका आठवें स्थान पर थी। मृतका के परिवार की आर्थिक स्थिति डांवाडोल थी जिस पर मैं समय-समय पर उनकी सहायता करता रहता था। इसी दरम्यान मृतका की मां को कैंसर हो गया जिसके इलाज हेतु वह अक्सर वाराणसी जाती रहती थी। उनकी गैरमौजूदगी में भी उनके घर आता जाता रहा। उसी दौरान मृतका और मेरे मध्य नज़दीकियां बढ़ीं और वह शारीरिक संबंध तक जा पहुंची। मृतका अपने कालेज में क्लर्क व कुछ लड़कों से बातचीत करती रहती थी और मेरे द्वारा कई बार मना किया गया परंतु वह नहीं मानी और कहती थी कि यह मेरी जिंदगी है इसमें आप से कोई मतलब नहीं है। उसकी यह बात मुझे काफी नागवार लगी थी और मैंने उससे निकाह करने को भी तैयार था परन्तु इसके लिए उसने मना कर दिया था। जिस पर मैंने उसे जान से मारने का मन बनाया था। इसी बीच उसने पढ़ाई और नौकरी के लिए किछौछा शरीफ मजार पर मन्नत मांगी थी और वहीं पर मुझे साथ जाने के लिए कहती थी। घटना के दिन मैंने मृतका को फोन कर बुलाया और उसे दरगाह चलने के लिए कहा। हम लोग दरगाह पहुंचकर दर्शन किए और फिर वहां से वापस चल दिए। रास्ते में सुनसान स्थान पर सड़क के किनारे मैंने बाइक रोककर लघुशंका की इच्छा जाहिर की, तो वह दूसरी तरफ मुंह फेर कर खड़ी हो गई। उसी दरम्यान मैंने अपने पास रखा हुआ चापड़ निकाल कर मृतका पर वार कर दिया, जिससे वह लहूलुहान होकर गिरकर तड़पने लगी और मैंने उसे खींचकर झाड़ियों में ले जाकर उसके शरीर पर ताबड़तोड़ कई वार कर उसे पूरी तरह से मौत के घाट उतार दिया। मैंने उसका चेहरा पूरी तरह से काट डाला ताकि उसकी पहचान न हो सके। इसके बाद में मैं रौजा होते हुए वापस अपने गांव पखनपुरा चला गया। रास्ते में मैंने मृतका का बैग व चप्पल फेंक दिया था।
इस हत्याकांड का पर्दाफाश करने तथा हत्यारे को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में थानाध्यक्ष बिरनो अब्दुल वसीम खान, प्रभारी स्वाट टीम उपनिरीक्षक धर्मवीर सिंह, उपनिरीक्षक रामनिवास थाना बिरनो, उप निरीक्षक विजय यादव स्वाट टीम, उपनिरीक्षक इष्ट देव पांडेय थाना बिरनो, मुख्य आरक्षी संजय पटेल स्वाट टीम, आरक्षी विकास श्रीवास्तव, दिनेश कुमार राणा, आशुतोष, रामप्रकाश स्वाट टीम तथा आरक्षी राहुल, विजय व प्रशांत कुमार थाना बिरनो रहे। पुलिस अधीक्षक ने हत्याकांड के सफल अनावरण पर पुलिस टीम को ₹15000 से पुरस्कृत किए जाने की घोषणा की है। सुने पुलिस अधीक्षक की बाइट

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Author: Dr. A. K Rai

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