हिन्दी दिवस ! 14 सितम्बर

नई दिल्ली,14 सितम्बर 2019। राष्ट्र भाषा किसी देश का गौरव,पहचान और सम्मान होती है। भारत की अनेकता में एकता का सूत्रधार हिन्दी हमारे संस्कृति और संस्कार को प्रदर्शित करती है। विश्व की प्राचीन, समृद्ध और सीधी, सरल भाषा होने के साथ-साथ हिन्दी हमारी ‘राष्ट्रभाषा’ भी है। यही हिन्दी पूरे हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करती है। भारत की राष्ट्र भाषा हिन्दी आज विश्व के तमाम देशों में वार्तालाप में प्रयोग की जाती है। आज पेरिस,न्यूयॉर्क,लंदन,जोनासिनबर्ग, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया सहित जापान के विभिन्न शहरों जैसे कोबे, हमामात्सू,टोक्यो में आज भी हिंदी को जानने सुनने वाले काफी आसानी से मिलते हैं। जापान से हिन्दी का सम्बन्ध 100वर्षों पुराना है। जापान में हिन्दी की पढ़ाई सबसे पहले टोक्यो विश्वविद्यालय में आरम्भ हुई थी। जापान के रेडियो पर 1940 से ही हिन्दी भाषा का प्रसारण होता रहा है। जापान के प्रोफेसर दोई क्यूया ने जहां हिन्दी शब्दकोश की रचना की, वहीं हिन्दी साहित्य की महत्वपूर्ण रचनाओं का जापानी भाषा में अनुवाद कर हिन्दी भाषा को पोषित किया। जापान में मुंशी प्रेमचंद, कबीर, सूरदास, तुलसीदास, सुमित्रा नन्दन पंत,महावीर प्रसाद, सूर्य कान्त त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा, हजारी प्रसाद द्विवेदी, रामधारी सिंह दिनकर, जैनेन्द्र कुमार, धर्मवीर भारती सहित दर्जनों लेखकों के साहित्य को जापानी भाषा में प्रकाशित किया जा चुका है। हिंदी भाषा का प्रसार अब विश्वव्यापी हो चुका है और इसके प्रसारित करने में हिंदी साहित्यकारों की लेखनी और हिंदी फिल्मों की खास भूमिका रही है। आज हिंदी साहित्य व फिल्मों को विश्व के कई भाषाओं में डव किया गया है। हिंदी साहित्य व फिल्मों के जरिए कई देश के लोग हिंदू संस्कृत से जुड़े हैं।
हिन्दी की लोकप्रियता का अंदाजा तो इसी बात से होता है कि आज पूरे विश्व में बोली जाने वाली लगभग 6500 भाषाओं में हिन्दी तीसरे स्थान पर प्रतिष्ठित है। स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत राष्ट्र भाषा के रूप में हिन्दी को मान्यता दिलाने में काफी लम्बी बहसें हुई। हिंदी को राजभाषा के रूप में मान्य कराने में कई निष्ठावान समर्थकों ने हिंदी के पक्ष में जोरदार पैरवी की। इन लोगों में से सबसे उल्लेखनीय व्यक्ति व्यौहार राजेन्द्र सिन्हा, हजारी प्रसाद द्विवेदी, काका कालेलकर, मैथिली शरण गुप्त और सेठ गोविंद दास रहे,जिन्होंने इस मुद्दे पर संसद में भी बहस की। बताया कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक, पढ़े लिखे लोगों के साथ साथ अनपढ़ व्यक्ति भी हिन्दी भाषा को आसानी से बोल-समझ लेता है। यही इस भाषा की पहचान भी है कि इसे बोलने और समझने में किसी को कोई परेशानी नहीं होती। लंबे विचार-विमर्श के बाद अंततः 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राष्ट्र भाषा के रूप में मान्यता का निर्णय लिया।लंबे विचार-विमर्श के बाद आखिरकार 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के रूप में चुनने का निर्णय लिया। संविधान सभा ने देवनागरी लिपी में लिखी हिंदी को राष्ट्र की भाषा के तौर पर मान्य किया तथा अंग्रेजी को भारत में हिंदी के साथ-साथ एक अतिरिक्त आधिकारिक भाषा के रूप में चुना गया। यह निर्णय 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान के लागू होने के साथ ही प्रभावी हो गया। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 के तहत, देवनागरी लिपि में लिखी गई हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया गया। हिन्दी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर सन् 1953 से संपूर्ण भारत में प्रतिवर्ष 14 सितंबर को ‘हिन्दी दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा यह घोषणा की गई कि हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाएगा। तबसे लेकर आज तक हिन्दी ने विश्व में कई मुकाम स्थापित किये हैं। आज विभिन्न देशों के लोग हिन्दी के प्रति आकर्षित होकर हिन्दी सीख रहे हैं। आज हिन्दी की वैश्विक पहचान बन चुकी है। अनेकों अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन मंचों पर हिंदी के शब्दों को स्थान मिला है। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के वर्ड इंग्लिश एडिटर डेनिका सालाजार के अनुसार अब तक हिंदी के 900 शब्दों को डिक्शनरी स्वीकार कर चुकी है और इसमें हिंदी के शब्द सर्वाधिक हैं। वर्ष 2017 में ऑक्सफोर्ड ने करीब 70 भारतीय शब्द को डिक्शनरी में जगह दिया जिसमें सर्वाधिक 30 शब्द हिंदी के थे।वर्ष 2017 में नारी शक्ति तथा वर्ष 2018 में आधार शब्द को “हिंदी शब्द ऑफ द ईयर” के खिताब से नवाजा गया था। आज अनेकों एप हिन्दी भाषा में संचालित हो रहे हैं और नयी तकनीकी से रोजगार की भाषा बन रही है। आई टी क्षेत्र व कम्प्यूटर पर भी हिन्दी अपना वर्चस्व कायम कर रखा है।यह हिन्दी की लोकप्रियता ही है कि अनेकों विदेशी कम्पनियां जैसे फ्लिपकार्ट अमेजन,ईकामर्स बाजार भी हिन्दी मंच पर कार्य कर रही हैं।
आज हिन्दी भाषा व साहित्य की सेवा में लगे साहित्यकारों और हिन्दी के प्रति जागरूक व समर्पित देशवासियों को हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं…….।

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Author: Dr. A. K Rai

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