ब्रज भूमि से प्रधानमंत्री ने ‘‘स्वच्छता ही सेवा ’’ कार्यक्रम का आरम्भ

मथुरा, 11 सितंबर 2019। प्रधानमंत्री ने’स्वच्छता ही सेवा’का शुभारंभ आज श्रीकृष्ण की धरती से किया।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यहां ‘‘स्वच्छता ही सेवा ’’ कार्यक्रम की शुरूआत करने के उपरांत कहा कि पशुधन और पर्यावरण हमेशा से भारत के आर्थिक चिंतन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। आज पूरा विश्व पर्यावरण संक्षरण के लिये काम कर रहा है । पर्यावरण और पशुधन हमेशा से भारत के आर्थिक चिंतन का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और ऐसा कार्यक्रम प्रारंभ करने के लिये ब्रज भूमि से बेहतर कोई स्थान नहीं हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज पूरा विश्व पर्यावरण संरक्षण के लिए एक आदर्श ढूंढ रहा है लेकिन भारत के पास भगवान श्रीकृष्ण जैसा प्रेरणा स्रोत हमेशा से रहा है, जिनकी कल्पना ही पर्यावरण प्रेम के बिना अधूरी है। उन्होने आगे कहा कि‘‘स्वच्छता ही सेवा ’’ कार्यक्रम के पीछे महात्मा गाँधी के 150 वीं जयंती वर्ष की प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक से होने वाली समस्या समय के साथ गंभीर होती जा रही है, प्लास्टिक पशुओं की मौत का कारण बन रहा है। इसी तरह नदियां, तालाबों में रहने वाले प्राणियों का, उसमें रहने वाली मछलियों का प्लास्टिक को निगलने के बाद जिन्दा बचना मुश्किल हो जाता है। आप सभी लोगों को आज से सिंगल यूज प्लास्टिक से छुटकारा पाना ही होगा। हमें कोशिश करनी है कि दो अक्टूबर तक अपने दफ्तरों, घरों को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त करें । मैं गांव गांव में काम कर रहे सभी संगठनों, सरकारी स्कूलों, कार्यालयों और लोगों से इस अभियान से जुड़ने का आग्रह करता हूं।
प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम की शुरुआत गोसेवा से की। कचरा प्रबंधन से जुड़ी महिलाओं के साथ खुद कचरा छांटकर मोदी ने लोगों से प्लास्टिक का प्रयोग बंद करने की सांकेतिक अपील की।
उन्होंने कहा कि ‘स्वच्छता ही सेवा अभियान’ के साथ ही कुछ परिवर्तन हमें अपनी आदतों में भी करना होगा । हमें चाहिए कि हम जब भी बाहर जाएं तो हम अपने साथ एक थैला लेकर जाएं ताकि प्लास्टिक बैग की जरूरत न पड़ें।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुधारू पशुओं को गंभीर बीमारियों से मुक्त कराने के लिए तैयार की गई टीकाकरण योजना का शुभारम्भ कर यहां पं. दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान केंद्र का निरीक्षण और यहां आयोजित पशु मेले का उद्घाटन करने के बाद पशु पालन और इससे जुड़े विभागों की परियोजनाओं को भी परखा।

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Author: Dr. A. K Rai

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