धोखाधड़ी ! फर्जी आर्म्स लाईसेंस बनाने वाला गिरोह चढ़ा पुलिस के राडार पर

गाजियाबाद, 13 अगस्त 14 2019। भारी भरकम रकम लेकर फर्जी शस्त्र लाईसेंस बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने पांच लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लिया है।
जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने कल बताया कि कुछ दिन पूर्व दो लोगों ने शाहजहांपुर में बने लाईसेंस को ट्रांसफर करने के लिए आवेदन किया था। लाईसेंस पर डाले गये यूआईएन नंबर की जांच हेतु जब इंटरनेट पर डाला गया तो पता चला कि वह वैध नम्बर नहीं है।
डीएम पांडेय ने इसकी सूचना शाहजहांपुर के जिलाधिकारी को दी और एसएसपी सुधीर कुमार सिंह से मामले की जांच कराने के लिए कहा।
उन्होंने बताया कि जांच में एक गिरोह द्वारा लोगों से पैसे लेकर फर्जी लाईसेंस बनाने का मामला मिला। डीएम ने बताया कि इस गिरोह के सरगना हरिशंकर अवस्थी और उसका सहयोगी है जो शाहजहांपुर के ही रहने वाले हैं। जिनमें शस्त्रों की एक दुकान का संचालक भी शामिल है। उन्होंने बताया कि दोनों आरोपी जिलाधिकारी कार्यालय में नियुक्त कुछ संविदा कर्मियों से सांठगांठ कर फर्जी यूआईएन नंबर डाल कर लाईसेंस बनाते थे और उसके आधार पर शस्त्र उपलब्ध कराते थे।
पुलिस ने इस मामले में हरिशंकर अवस्थी, सदानंद शर्मा, फुरकान, संजय गर्ग और सदानंद शर्मा को गिरफ्तार किया है। शाहजहांपुर के कलेक्ट्रेट स्थित शस्त्र विभाग में तैनात आरोपी संविदाकर्मी पवनेश और श्याम बिहारी फरार हैं जिन्हें पकड़ने के प्रयास जारी हैं।
जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि शाहजहांपुर के सहरामऊ उत्तरी थाने से संबंधित शस्त्र लाईसेंस रजिस्टर वर्ष 2007 में गायब हो गया था जिसकी रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। तत्कालीन अभिलेख मौजूद न होने का फायदा उठाते हुए यह गिरोह पिछली तारीखों के फर्जी लाईसेंस बनाता था।
उन्होंने बताया कि असलहा रजिस्टर सील कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए एक समिति बनाई जाएगी जो सभी लाईसेंसों की जांच करेगी। साथ ही दूसरे राज्यों के सचिवों को भी जांच के लिए पत्र लिखा गया है। इस सम्बन्ध में अन्य जिलों में सूचना दे दी गयी है और शासन को भी मामले से अवगत करा दिया गया है।
पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि आरोपियों ने पूछताछ में कहा कि वे फर्जी हस्ताक्षर कर, मोहर लगा देते थे और नकली लाईसेंस जारी कर देते थे। आरोपियों का कहना है कि गन हाऊस का मालिक उन्हें फर्जी लाइसेंस पर शस्त्र उपलब्ध करा देता था।

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Author: Dr. A. K Rai

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