कालसर्प योग ! कारण व निवारण

कालसर्प योग
वाराणसी,05 अगस्त 2019। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु और केतू ग्रहों के बीच अन्य सभी ग्रह आ जाते हैं तो कालसर्प दोष बनता है। इसमें कुंडली के एक घर में राहु और दूसरे घर में केतु के बैठे होने से अन्य सभी ग्रहों से आ रहे फल रूक जाते हैं। इन दोनों ग्रहों के बीच में सभी ग्रह फँस जाते हैं और यह जातक के लिए एक समस्या बन जाती है। इस दोष के कारण फिर काम में बाधा, नौकरी में रूकावट, शादी में देरी और धन संबंधित परेशानियाँ उत्पन्न होने लगती हैं।
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि जन्मकुंडली में जब सात ग्रह सूर्य, चंद्रमा मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र व शनि जब राहु केतु के मध्य में स्थित हो जाते हैं तो जन्म कुंडली में पूर्ण कालसर्प योग बनता है। जब ग्रहों के अंश के अनुसार यदि कोई एक ग्रह राहु केतु की परिधि से बाहर हो तो आंशिक कालसर्प योग बनता है राहु का नक्षत्र भरणी है, इसका देवता काल माना गया है जबकि केतु का नक्षत्र आश्लेषा है,इसका देवता सर्प माना गया है। कालसर्प दोष कुंडली में खराब जरूर माना जाता है किन्तु विधिवत पूजन व शांति कराने से यही कालसर्प दोष सिद्ध योग भी बन सकता है।
बताते चलें कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु की कुंडली में भी यह दोष था और तो और क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर की कुंडली भी कालसर्प दोष से प्रभावित थी लेकिन फिर भी दोनों व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्रों में नाम और मान-सम्मान प्राप्त करने में सफल रहे।
प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों में 12 प्रकार के कालसर्प योगों का वर्णन किया गया है- यथा
1-अनन्त 2-कुलिक 3-वासुकि 4-शंखपाल 5-पद्म 6-महापद्म 7-तक्षक 8-कर्कोटिक 9-शंखचूड़ 10-घातक 11- विषाक्तर 12-शेषनाग।

अनंत कालसर्प योग
अगर राहु लग्न में बैठा है और केतु सप्तम में और बाकी ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच में तो कुंडली में अनंत कालसर्प दोष का निर्माण हो जाता है। अनंत कालसर्प योग के कारण जातक को जीवन भर मानसिक शांति नहीं मिलती। इस प्रकार के जातक का वैवाहिक जीवन भी परेशानियों से भरा रहता है।

कुलिक कालसर्प योग
अगर राहु कुंडली के दुसरे घर में, केतु अष्ठम में विराजमान है और बाकी ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच में है तब कुलिक कालसर्प योग का निर्माण होता है। इस योग के कारण व्यक्ति के जीवन में धन और स्वास्थ्य संबंधित परेशानियाँ उत्पन्न होती रहती हैं।

वासुकि कालसर्प योग
जन्मकुंडली के तीसरे भाव में राहु और नवम भाव में केतु विराजमान हो तथा बाकि ग्रह बीच में तो वासुकि कालसर्प योग का निर्माण होता है। इस प्रकार की कुंडली में बल और पराक्रम को लेकर समस्या उत्पन्न होती हैं।

शंखपाल कालसर्प योग
अगर राहु चौथे घर में और केतु दसवें घर में हो साथ ही साथ बाकी ग्रह इनके बीच में हों तो शंखपाल कालसर्प योग का निर्माण होता है। ऐसे व्यक्ति के पास प्रॉपर्टी, धन और मान-सम्मान संबंधित परेशानियाँ बनी रहती हैं।

पद्म कालसर्प योग
जब जन्मकुंडली के पांचवें भाव में राहु, ग्याहरहवें भाव में केतु और बीच में अन्य ग्रह हों तो पद्म कालसर्प योग का निर्माण होता है। ऐसे इंसान को शादी और धन संबंधित दिक्कतें परेशान करती हैं।

महा पद्म कालसर्प योग
अगर राहु किसी के छठे घर में और केतु बारहवें घर में विराजमान हो तथा बाकी ग्रह मध्य में तो तब महा पद्म कालसर्प योग का जन्म होता है। इस प्रकार के जातक के पास विदेश यात्रा और धन संबंधित सुख नहीं प्राप्त हो पाता है।

तक्षक कालसर्प योग
जब जन्मकुंडली के सातवें भाव में राहु और केतु लग्न में हो तो इनसे तक्षक कालसर्प योग बनता है। यह योग शादी में विलंब व वैवाहिक सुख में बाधा उत्पन्न करता है।

कर्कोटक कालसर्प योग
अगर राहु आठवें घर में और केतु दुसरे घर आ जाता है और बाकी ग्रह इनके बीच में हों तो कर्कोटक कालसर्प योग कुंडली में बन जाता है। ऐसी कुंडली वाले इंसान का धन स्थिर नहीं रहता है और गलत कार्यों में धन खर्च होता है।

शंखनाद कालसर्प योग
जब जन्मकुंडली के नवम भाव में राहु और तीसरे भाव में केतु हो और सारे ग्रह इनके मध्य हों तो इनसे बनने वाले योग को शंखनाद कालसर्प योग कहते है। यह दोष भाग्य में रूकावट, पराक्रम में रूकावट और बल को कम कर देता है।

पातक कालसर्प योग
इस स्थिति के लिए राहु दसंम में हो, केतु चौथे घर में और बाकी ग्रह इन दोनों ग्रहों के बीच में तब पातक कालसर्प योग का निर्माण होता है। ऐसा राहु काम में बाधा व सुख में भी कमी करने वाला बन जाता है।

विषाक्तर कालसर्प योग
जब जन्मकुंडली के ग्याहरहवें भाव में राहु और पांचवें भाव में केतु हो और सारे ग्रह इनके मध्य मे अटके हों तो इनसे बनने वाले योग को विषाक्तर कालसर्प योग कहते है। इस प्रकार की कुंडली में शादी, विद्या और वैवाहिक जीवन में परेशानियां बन जाती हैं।

शेषनाग कालसर्प योग
अगर राहु बारहवें घर में, केतु छठे में और बाकी ग्रह इनके बीच में हो तो शेषनाग कालसर्प योग का निर्माण होता है। ऐसा राहु स्वास्थ्य संबंधित दिक्कतें, और कोर्ट कचहरी जैसी समस्याएं उत्पन्न करता है।

कालसर्प योग दूर करने के उपाय
विद्वानों के अनुसार कालसर्प योग का निवारण भगवान शिव के प्रतिष्ठित मंदिर में विधि-विधान के अनुसार योग्य विद्वान से कराना लाभकारी होता है। कालसर्प योग के निवारण स्वर्ण, चांदी या तांबे के बने नाग नागिन के जोड़े शिवलिंग पर चढ़ा कर पूजा करने के उपरांत नाग नागिन के जोड़े को बहते हुए शुद्ध जल, नदी अथवा गंगाजी में प्रवाहित करना चाहिए। स्वर्ग रजत या पंचधातु से निर्मित सर्पाकार अंगूठी दाहिने हाथ की मध्यमा अंगुली में धारण करनी चाहिए। कालसर्प दोष निवारण के लिए काशी की जैतपुरा स्थित नागेश्वर महादेव के मंदिर में विधि विधान सहित पूजा अर्चन करना चाहिए।
सामान्य रूप में – शिवलिंग पर प्रतिदिन जल चढ़ाएं। महादेव का रुद्राभिषेक व नागपंचमी का व्रत करें। मोर का पंख सदा अपने निवास स्थान पर रखें। कुल देवता की उपासना करें। प्रतिदिन महा मृत्युंजय मन्त्र का जाप करें। मंगलवार एवं शनिवार को रामचरितमानस के सुंदरकाण्ड का श्रद्धापूर्वक पाठ करना चाहिए।

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Author: Dr. A. K Rai

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