भोजपुरी  गीत ! “बरसे ले बदरिया सावन में”

“बरसे ले बदरिया सावन में”

बरसे ले बदरिया सावन में,
बहके ला इ मनवा सावन मे।
बदरा में सजेला फूलन के गजरा
गोरिया भी सजेलीं सावन में।

गरजे ले बदरिया सावन में,
करवट जो बदले याद सताए
अखरे ले दूरी मन घबराए ,
पिया न आवे रात सताए
बरसे जब बदरिया सावन में।

चमके जब बिजुरिया सावन में,
निंदिया भी उड़ावे सावन में।
याद पिया के सबके सतावे,
बरसे जब बदरिया सावन में।

बेला जो महके याद सतावे,
निंदिया उड़ावे चैन चुरावे।
याद पिया के हर पल सतावे।
बरसे जब बदरिया सावन में।

गोरी जो तड़पे , मन बा इ बहके
हरियाली जो छाए , गोरी मन भाए।
बारिश के बूंद मन में आष जगावे
बरसे जब बदरिया सावन में,
बहके ला मन सभी के सावन में।।

    कवि - अशोक राय वत्स
     रैनी (मऊ)  उत्तरप्रदेश
         मो.8619668341

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Author: Dr. A. K Rai

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