लू (सन स्ट्रोक)! जानकारी ही बचाव

वाराणसी, 18 जुन 2019। तीव्र गर्मी में लू लगना आम बिमारी है। इससे बचने के हमें जरूरी एहतियात बरतने की आवश्यकता होती है। इसके लिए आवश्यक है कि जब हम धूप में निकले तो सावधानियां अवश्य बरतें। ल लगने के कारण कभी कभी अचानक मृत्यु तक हो जाती है।
बताते चलें कि मानव शरीर का सामान्य तापमान सदैव 37° डिग्री सेल्सियस निश्चित होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग व तंत्र सामान्यतः सही ढंग से काम करते है। भौतिक नियमों के अनुसार जब वातावरणीय ताप शरीर के तापमान से अधिक होने लगता है तो वातावरण का ताप शरीर में प्रविष्ट होने लगता है,तब हमारा शरीर हमें गर्मी लगने की सूचना देने लगता है। इस स्थिति में शरीर पसीने के रूप में शरीर से पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर मेंटेन रखने में लगा रहता है। लगातार पसीना निकलते वक्त हमारे लिए पानी पीते रहना अत्यंत जरुरी और आवश्यक है। शरीर को जीवन्त बनाये रखने व अपने कार्यों को सामान्य रूप से सम्पादित करने में जल की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है।जब शरीर में जिससे शरीर में पानी की कमी होने लगती है तो शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना बंद कर अपने कार्यों हेतु पानी को रोकता है। जब वातावरण का ताप 45° डिग्री के उपर होने लगता है तो शरीर के तापमान को नियंत्रित करने वाली कूलिंग व्यवस्था डगमगाने लगती है। इसके फलस्वरूप शरीर का तापमान 37° डिग्री से ऊपर होने लगता है।जब शरीर का तापमान 42° सेल्सियस तक पहुँचने लगता है तब शरीर में गर्मी के कारण रक्त गरम होने लगता है और रक्त में पानी की मात्रा कम होने लगती है।शरीर का पानी कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है, ब्लडप्रेशर सामान्य से कम हो जाता है, शरीर के महत्वपूर्ण अंग (विशेषतः ब्रेन) तक रक्त प्रवाह रुकने लगता है। रक्त में उपस्थित प्रोटीन पकने लगता है, स्नायु कड़क होने लगते हैं इस दौरान सांस लेने के लिए जरुरी स्नायु भी काम करना बंद कर देते हैं। यदि यथाशीघ्र उपचार नहीं मिला तो व्यक्ति कोमा में चला जाता है और उसके शरीर के एक-एक अंग धीरे धीरे काम करना बंद कर देते हैं और उसकी मृत्यु हो जाती है।

बचाव
एक बिना प्रयोग की हुई मोमबत्ती को कमरे से बाहर या खुले मे रखें, यदि मोमबत्ती पिघल जाती है तो यह गर्मी केगंभीर स्थिति की सूचक है।
गर्मी के दिनों में ऐसे अनर्थ को टालने के लिए लगातार थोड़ा- थोड़ा पानी पीते रहना चाहिए और यथासंभव शरीर को धुप व ताप से बचाना चाहिए।इससे शरीर निर्जलीकरण की स्थिति से बचा रहेगा।
अपने शरीर के तापमान को 37°सेल्सियस पर रखने हेतु नम व ठंढे स्थानों पर कमरों के भीतर रहना चाहिए और जितना सम्भव हो,धूप से बचना चाहिए। शरीर को नियंत्रित करने के लिए कम से कम 3 लीटर पानी अवश्य पियें। किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 लीटर पानी जरूर लें। जहां तक सम्भव हो ब्लड प्रेशर पर नजर रखें। फल और सब्जियों को भोजन मे ज्यादा स्थान दें। घी,तेल व मसालों का उपयोग कम करें। शयन कक्ष और अन्य कमरों मे दो आधे पानी से भरे ऊपर से खुले पात्रों को रख कर कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है।
कच्चे आम को भूनकर उसे पानी में घोलकर और फिर छानकर उसमें काला नमक व भूनें हुए जीरा को मिलाकर दो तीन गिलास पीने से लू का असर खत्म होता है। होम्योपैथी की दवा ग्लोनाइन भी अच्छा काम करती है।
यदि स्थिति गंभीर हो तो शीघ्र चिकित्सक से सम्पर्क स्थापित कर इलाज कराना चाहिए।

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Author: Dr. A. K Rai

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