गिरफ्तारी अवैध! शीर्ष अदालत ने पत्रकार को रिहा करने के दिए आदेश

नई दिल्ली, 11जून 2019। शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोपी प्रशांत कनौजिया को रिहा करने का आदेश दिया है।
बताते चलें कि शीर्ष अदालत में कल पत्रकार प्रशांत कनौजिया की पत्नी जिगीशा अरोड़ा ने याचिका दायर कर तत्काल सुनवाई की मांग की थी। याचिका में प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी को अवैध और असंवैधानिक बताया गया था। गिरफ्तारी के विरुद्ध दायर याचिका पर आज शीर्ष अदालत में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पत्रकार को तुरंत रिहा किया जाए। कोर्ट ने यूपी पुलिस से पूछा है कि ट्वीट के लिए गिरफ्तारी की क्या ज़रूरत थी। कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन गिरफ्तारी क्यों की गई?
उल्लेखनीय है कि कनौजिया ने ट्विटर और फेसबुक पर वीडियो साझा किया था जिसमें एक महिला मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर विभिन्न मीडिया संगठनों के संवाददाताओं के समक्ष यह दावा करती दिख रही है कि उसने आदित्यनाथ को शादी का प्रस्ताव भेजा है।
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि जब मौलिक अधिकार का हनन हो तो हम ये नहीं कह सकते कि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट जाए। इससे पहले यूपी सरकार ने कहा था कि पत्रकार को गिरफ्तारी के बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया है। अगर याचिकाकर्ता को इसके बाद कुछ कहना है तो उसे हाईकोर्ट जाना चाहिए।

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Author: Dr. A. K Rai

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