गीत -“हम सा न मिलेगा दुबारा”

“हम सा न मिलेगा दुबारा”

आओ कराएं हम पहचान हमारे रिस्ते की,
खूबसूरती कभी न कम होगी हमारे इस रिस्ते की।
मिलेगी हर पल शीतलता यदि पास तुम आओगी,
नफरत की इस दिल में कभी बात नहीं पाओगी।

जो बनातें हैं रिस्ते बस मतलब की खातिर,
कभी भी वो रिस्ते निभाते नहीं हैं।
आजमाना हो हमको तो दिल में उतर के देखो,
चोट खाकर भी रिस्ते निभाते हैं हम तो।

देखनी हो जो तुमको हकीकत हमारी,
तो चुपके से आंखों में झांको हमारी।
जो सूरत तुम्हारी न नजर आए उसमें,
तो समझो फरेबी है मुहब्बत हमारी।

ये दौलत जहां की मिले न हमें तो भी,
ये खुशियाँ तो हरपल आती रहेंगी।
अगर साथ दोगी जहां में हमारा,
तो मुहब्बत हमारी भी दास्तान होगी।

इस कदर न दुखाओ दिल तुम हमारा,
मिलेगा न हमसा हमसफर दुबारा।
मानो बात वत्स की करो कुछ जतन,
इस दुनिया में हमसा न मिलेगा दुबारा।

रचनाकार – अशोक राय वत्स

मोबाइल नं. 8619668341

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Author: Dr. A. K Rai

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